वर्ष 2027 उत्तराखण्ड के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण विधान सभा चुनाव, अर्धकुंभ और जनगणना इन मोर्चों पर एक साथ साबित करनी होगी सरकारी व प्रशासनिक क्षमता

वर्ष 2027 उत्तराखण्ड के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण विधान सभा चुनाव, अर्धकुंभ और जनगणना इन मोर्चों पर एक साथ साबित करनी होगी सरकारी व प्रशासनिक क्षमता

देहरादून ।
उत्तराखंड के लिए वर्ष- 2027 अत्यधिक चुनौतीपूर्ण साल रहने वाला है। वजह है, एक ही समयावधि में तीन व्यापक और संवेदनशील कार्यक्रमों- विधानसभा चुनाव, हरिद्वार में अर्धकुंभ मेले का आयोजन और देशव्यापी जनगणना की प्रस्तावित प्रक्रिया को सुव्यवस्थित तरीके से पूर्ण कराना । यद्यपि इन तीनों आयोजनों में अभी लगभग एक वर्ष का समय बांकी है, परन्तु प्रस्तावित आयोजनों के संभावित दबाव को देखते हुए शासन स्तर पर अभी से तैयारियों का ठोस खाका तैयार किया जा रहा है।

राज्य की 70 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव फरवरी–मार्च 2027 में संभावित हैं। इसी अवधि में हरिद्वार में अर्धकुंभ मेले का आयोजन निर्धारित है, जहां देश और विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान रहता है। इसी के साथ भारत सरकार की महत्वाकांक्षी जनगणना प्रक्रिया भी लगभग उसी समयावधि में शुरू की जानी है।
इन तीनों कार्यक्रमों के एक साथ होने से मानव संसाधन, सुरक्षा प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था और विभागीय समन्वय को लेकर खाश रणनीति बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

तमाम सम्भावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन द्वारा राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई चरणों में बैठकें की जा चुकी हैं। बैठकों में इस बात पर विस्तार से विचार किया गया कि तीनों आयोजनों को बिना किसी व्यवधान के किस प्रकार से सफलतापूर्वक संपन्न कराया जाए।

सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव, अर्धकुंभ और जनगणना के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हों और कार्मिकों की तैनाती संतुलित ढंग से की जाए।

यह सर्वविदित है कि .हरिद्वार में आयोजित होने वाला अर्धकुंभ अपने आप में एक विशाल धार्मिक आयोजन होता है। आस्था के इस महापर्व में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिसके लिए व्यापक पुलिस बल, अर्धसैनिक बल, स्वास्थ्य सेवाएं, यातायात नियंत्रण और आपदा प्रबंधन तंत्र की आवश्यकता होती है।

अक्सर राज्य को अन्य प्रदेशों से भी अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मदद लेनी पड़ती है, ताकि कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रखी जा सके। इस बार चुनौती इसलिए अधिक जटिल है, क्योंकि उसी समय विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं, जिनमें सुरक्षा बलों की मांग पहले से ही अधिक रहती है ।

चुनाव और अर्धकुंभ के अतिरिक्त जनगणना प्रक्रिया की भी व्यापक प्रशासनिक तैयारी की जरूरत पड़ती है। इन कार्यों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति होती है, जिन्हें घर-घर जाकर आंकड़े एकत्रित करने, डेटा सत्यापन और निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी निभानी होती है।

ऐसे में एक साथ तीन बड़े कार्यों का एक साथ सफलतापूर्वक संचालन करना, सरकार व प्रशासन दोनों के लिए समन्वय और संसाधन प्रबंधन की दृष्टि से बड़ी परीक्षा की तरह होगा।

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